मंदिर की विशेषताएँ और इतिहास
स्थान: यह मंदिर आगर-मालवा शहर से लगभग 5 किलोमीटर दूर इंदौर-कोटा राष्ट्रीय राजमार्ग 27 पर, सुरम्य पहाड़ियों और बाणगंगा नदी के तट पर स्थित है।
निर्माण: मूल मंदिर की स्थापना के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन माना जाता है कि इसे 16वीं शताब्दी (लगभग 1563 ईस्वी) में मोड़ वैश्यों द्वारा एक छोटे मठ के रूप में स्थापित किया गया था।
अंग्रेज कर्नल की कहानी: वर्ष 1879 में, आगर छावनी में तैनात अंग्रेज कर्नल मार्टिन अफगानिस्तान युद्ध में गए थे। जब महीनों तक उनके कोई समाचार नहीं मिले, तो उनकी पत्नी ने उनके सुरक्षित लौटने के लिए बैजनाथ महादेव से मन्नत मांगी। मन्नत पूरी होने और कर्नल मार्टिन के सकुशल वापस आने के बाद, उन्होंने वर्ष 1883 में मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और मंदिर के अग्रभाग में एक शिलालेख भी लगवाया।
वास्तुकला: यह मंदिर उत्तर और दक्षिण भारतीय कलात्मक शिल्प का एक अनूठा संगम है।
चमत्कारिक मान्यताएँ: मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारिक कहानियाँ प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कथा एक वकील जयनारायण उपाध्याय (बापजी) की है, जिनकी पैरवी स्वयं भगवान शिव ने वकील के वेश में कोर्ट में की थी, जब वे मंदिर में ध्यानमग्न थे।